गांव बूटे दियां छन्नां के सरपंच की हत्या के बाद कौन आऐगा पुलिस की मदद के लिए आगे..?

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सरपंच ने पुलिस को बताए नशा तस्करों के नाम तो हेड मुंशी ने नशा तस्करों को दे दी शिकायतकर्ता की सूचना

सरंपच को जान देकर चुकानी पड़ी थी पुलिस के हेड मुंशी की नशा तस्करों के साथ मिलीभुगत की कीमत

टाकिंग पंजाब

जालंधर। कमिश्नरेट पुलिस बड़ी ही मजबूती से दावा करती है कि आप हमें नशा तस्करों की जानकारी दीजिए, हम आपकी सुरक्षा की गारंटी लेते हैं, लेकिन पुलिस की इस गांरटी के बावजूद गांव के एक सरपंच की जान चली गई। जालंधर के महतपुर ब्लॉक के अंतर्गत गांव बूटे दियां छन्नां के सरपंच महिंदर सिंह का कसूर मात्र इतना था कि उसने पुलिस को नशा तस्करों के बारे में सूचना दी थी। सरपंच की यह सूचना नशा तस्करों तक पहुंच गई व नशा तस्करों ने सरपंच पर तेजधार हथियारों से हमला कर दिया था।  इस हमले में 62 वर्षीय सरपंच की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस प्रशासन ने महतपुर थाने के हेड मुंशी सुखबीर सिंह को सस्पेंड कर दिया है। मुंशी पर आरोप है कि वह नशे से जुड़ी गुप्त सूचनाएं तस्करों तक पहुंचाता था। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी राजा और उसके साथियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। सवाल यह है कि इस सरपंच की हत्या व सूचना लीक होने की खबर फैलने के बाद कोई क्यों अपनी जान जोखिम में डालकर नशा तस्करों की सूचना पुलिस को देगा ?। हो सकता है कि जिस थाने में आम आदमी नशा तस्करों की सूचना दे, उसका भी पुलिस कर्मचारी नशा तस्करों से मिला हो।  शिकायतकर्ताउसको भी इस सूचना का हर्जाना अपनी जान देकर चुकाना पड़े,जिस तरह से नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले बुजुर्ग सरपंच को उठाना पड़ा है। गांव बूटे दियां छन्नां के सरपंच महिंदर सिंह लंबे समय से गांव के युवाओं को नशे की दलदल से बचाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने गांव में सक्रिय नशा तस्करों का कड़ा विरोध किया था। पुलिस को नशा तस्करों की सूचना देने के बाद पुलिस उनकी सुरक्षा करने में नाकाम हो गई। सरपंच की मौत के बाद इंसाफ की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने महतपुर थाने के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया।  प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाने का हेड मुंशी सुखबीर सिंह नशा तस्करों का मुखबिर बना हुआ था।   आरोप है कि जब भी ग्रामीण या सरपंच नशे की तस्करी के बारे में थाने में कोई सूचना देते थे, तो मुंशी सुखबीर सिंह वह जानकारी कथित तौर पर आरोपियों को लीक कर देता था, जिससे तस्करों के हौसले बुलंद थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सुखपाल सिंह ने रिपोर्ट एसएसपी को भेजी। इसके बाद हेड मुंशी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। सरपंच की मौत के बाद गांव के लोगों में नशा तस्करों के खिलाफ भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी राजा की गिरफ्तारी नहीं होती और नशे के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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