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प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह ने की सिविल इंजीनियरिंग विभाग के स्टाफ व विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा
इस परियोजना में सुरक्षित एवं प्रभावी हाईवे बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। परियोजना में ज्यामितीय डिज़ाइन के तत्वों जैसे कर्व्स, ग्रेडिएंट्स, साइट डिस्टेंस तथा सुपर एलिवेशन के महत्व को दर्शाया गया, साथ ही बैरियर्स और एस्केप रैंप जैसी सुरक्षा सुविधाओं को भी प्रदर्शित किया गया। मॉडल में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए वाटर-रिपेलिंग ग्रोइन्स, ढलानों की मजबूती के लिए रिटेनिंग वॉल्स तथा अनियंत्रित वाहनों को रोकने हेतु हाईवे एस्केप रैंप जैसी आधुनिक विशेषताओं को दर्शाया गया। पहाड़ी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ब्रेस्ट वॉल्स, रॉकफॉल बैरियर्स और वायर मेश प्रोटेक्शन सिस्टम्स पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
इसके अतिरिक्त, हाइड्रोसीडिंग विद सीटीए बार्स तथा शॉटक्रीट विद सॉइल नेलिंग तकनीकों को पर्यावरण-अनुकूल एवं प्रभावी ढलान स्थिरीकरण उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस परियोजना की एक विशेष विशेषता “रेड रोड” अवधारणा रही, जिसे जंगलों एवं दुर्घटना- प्रभावित क्षेत्रों में दृश्यता बढ़ाने और वाहन चालकों को सतर्क करने के उद्देश्य से विकसित किया गया। इस परियोजना ने संरचनात्मक एवं गैर-संरचनात्मक दोनों प्रकार के सुरक्षा उपायों को एकीकृत कर हाईवे इंजीनियरिंग की व्यावहारिक समझ को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
हाईवे सुरक्षा में इसकी व्यावहारिक उपयोगिता के कारण इस परियोजना की निर्णायकों एवं दर्शकों द्वारा भरपूर सराहना की गई। प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह ने सिविल इंजीनियरिंग विभाग के स्टाफ एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा की। इस सहभागिता ने संस्थान की व्यावहारिक शिक्षा एवं नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया तथा वर्तमान बुनियादी ढांचे और सड़क सुरक्षा की आवश्यकताओं के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता को उजागर किया। अंत में, प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह ने समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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