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शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा ध्रुव तारे की तरह चमकता रहेगा स्व. श्रीमती शांता चोपड़ा जी का नाम- अनिल चोपड़ा
वहीं पंडित जी द्वारा पूजा की गई और इसके उपरांत कुष्ठ आश्रम में रह रहे रोगियों के लिए लंगर का आयोजन किया गया। उनके बड़े बेटे अनिल चोपड़ा, बहू संगीता चोपड़ा, छोटे बेटे सुनील चोपड़ा ने अपने हाथों से सभी को लंगर बांटा। श्री चोपड़ा ने बताया कि उनकी माता शांता चोपड़ा की शिक्षा के साथ-साथ हमेशा समाज के इस खास वर्ग के साथ खास सांत्वना रही है और समाज सेवा के लिए वह हमेशा तत्पर रही हैं। इसी कारण उनकी बरसी यहां मनाई जाती है ताकि उनकी सोच को बाकियों तक पहुंचा जा सकें। स्व. शांता चोपड़ा जी ने 1958 में एक स्कूल से शुरुआत की थी जो वृक्ष आज पूरे उत्तर भारत में अपनी 58 ब्रांचों को फैला चुका है।


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