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बच्चों को इस धार्मिक स्थल पर ले जाने का उद्देश्य उनमें धार्मिक प्रवृत्ति को जागृत करना रहा
सभी बच्चों ने बड़े अनुशासित ढंग से गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश किया, रुमाल से सिर ढककर श्री गुरु ग्रंथ साहब के सामने माथा टेका। बच्चों ने अपनी मीठी आवाज़ में मूल-मंत्र तथा ‘सतिनाम, श्री वाहेगुरु’ का जाप किया और फिर कीर्तन का श्रवण किया। कुछ बच्चों ने शबद-कीर्तन में अपना सहयोग भी दिया। गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी सिंह ने बच्चों को ‘नाम जपो, वंड छको, किरत करो’ का अर्थ समझाया। बच्चों ने दोनों हाथ जोड़कर प्रसाद लिया। अध्यापिकाओं ने बच्चों को सिख गुरुओं द्वारा किए गए कार्यों, शिक्षाओं और उनके बलिदानों संबंधी जानकारी दी।

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