आवारा कुतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक… कुत्तों से ज्यादा लोगों की जान की सुरक्षा जरूरी

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नवंबर 2025 में दिए निर्देशों को वापस लेने वाली सभी याचिकाओं को किया खारिज, निर्देश न माननें वाले आफिसरों पर चलाया जाए अवमानना का केस

टाकिंग पंजाब

नई दिल्ली। देश में अवारा कुत्तों की बढती आबादी व उनके काटने से जा रही लोगों की जान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फैंसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर मंगलवार को हुई सुनवाई दौरान कोर्ट ने कहा कि खतरनाक व बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जो अफसर निर्देश न मानें, उन पर अवमानना का केस चलाया जाए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी शामिल है।   इस दौरान अदालत ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर नवंबर 2025 में दिए गए निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। आपको बता दें कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखें और उन्हें वापस न छोड़ें। कोर्ट ने सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी बैन लगाया था। इसके बाद डॉग लवर्स और एनजीओ ने इन निर्देशों को रद्द करने के लिए कई याचिकाएं दाखिल की थीं, जिसको आज सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

   पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था, हमारी बात मजाक न समझें

    इस मामले में पिछले सुनवाई 29 जनवरी को हुई थी, जिसमें बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था। इस दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने दलीलें रखी थीं। कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा, हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है। दरअसल यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था।  सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। फिर 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है व जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था। बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया। फिर 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और एनएचएआई को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था।

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