रूस ने फिर से की रूस-भारत-चीन (आरआईसी)त्रिपक्षीय संवाद को शुरू करने की पहल
टाकिंग पंजाब
नई दिल्ली। भारत व रूस की दोस्ती सदियों से चली आ रही है, लेकिन इसके विपरीत चीन हमेशा से ही भारत का प्रतिद्वंद्वी देश रहा है। अगर हम कहें कि भारत व चीन अच्छे दोस्त बन सकते हैं तो शायद आपको यकीं नहीं होगा, लेकिन रूस इस कोशिश में लगा हुआ है कि भारत व चीन के बीच रिश्ते सुधर जाएं ओर यह दोनो देश अच्छे दोस्त बन जाएं। दरअसल रूस चुपचाप अपनी एशियाई रणनीति को नए सिरे से तैयार करने में जुटा है। रूस लगातार भारत के साथ हथियारों के सौदे और कूटनीतिक संपर्क बढ़ाता जा रहा है। हालांकि, यह बात अमेरिका को रास नहीं आ रही है। इसी बीच पश्चिम देशों को चुनौती देने के लिए रूस ने फिर से रूस-भारत-चीन (आरआईसी)त्रिपक्षीय संवाद को शुरू करने की पहल की है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेईलावरोव ने 29 मई को एक सुरक्षा सम्मेलन में कहा था कि अब समय आ गया है कि इस मंच को फिर से पुनर्जीवित किया जाए। आखिर क्या है यह आरआईसी का उद्देश्य ? आइए पहले समझ लें कि यह आरआईसी (रशिया-इंडिया-चाईना) त्रिपक्षीय संवाद क्या है। रूस-भारत-चीन (आरआईसी)त्रिपक्षीय संवाद को शुरू करने की रूस आखिर क्यों कोशिश कर रहा है, आपको इस खबर में पता चल जाऐगा। दरअसल, साल 1990 के दशक के अंत में रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनीप्रीमाकोव ने यूरेशिया क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए तीनों देशों के बीच रिश्तों में मजबूत करने कोशिश की थी। इस मंच के तहत अब तक 20 से अधिक मंत्रिस्तरीय बैठक हो चुकी हैं। हालांकि, साल 2020 में गलवान घाटी में हुए भारत-चीन संघर्ष के बाद आरआईसी की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में काफी गरमाहट देखी जा सकती है। यह बात न तो रूस और चीन, दोनों को पसंद नहीं आ रही। रूस का मानना है कि कईं देश चीन को उकसा रहे हैं। वहीं, आरआईसी एक स्वतंत्र और संतुलित मंच है, जो पश्चिम देशों का मुकाबला कर सकती है। भले ही भारत लगातार रूस से सैन्य सामग्री खरीद रहा है। वहीं, रूस के सैन्य उपकरणों पर भारत को पूरा भरोसा भी है, लेकिन भारतद अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के साथ भी रक्षा उपकरणों को खरीदने पर जोर दे रहा है। रूस इस ग्रुप को तैयार तो कर रहा है लेकिन जानकारों का मानना है कि भारत चीन पर भरोसा नहीं कर सकता। भारत ने हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रखी है। भारत न तो कभी अमेरिका पर निर्भर रहा है और न ही रूस या चीन पर। वहीं, भारत ने हमेशा चीन को एक प्रतिद्वंद्वी देश के रूप में देखता है। रूस की कोशिश है कि भारत और चीन के बीच दोस्ती स्थापित हो जाए लेकिन ‘ड्रैगन’ की हरकतें भारत को परेशान कर रही है। इसका उद्हारण यह है कि कुछ दिनों पहले हुए सैन्य संघर्ष के दौरान चीन ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। वहीं, चीन की विस्तारवादी नीति से भारत भली भांति परिचित है। भारत कभी भी चीन पर आंख मूंदकर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ा सकता। चीन और रूस की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर ही आरआईसी की सफलता निर्भर करेगी। देखतें हैं, आगे आगे होता है क्या..।