एचएमवी में ‘ज़ीमैन प्रभाव के माध्यम से परमाणु संरचना का अनावरण’ विषय पर सेमिनार का आयोजन

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प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने की विभाग के प्रयासों की सराहना

टाकिंग पंजाब

जालंधर। हंसराज महिला महाविद्यालय,जालंधर के स्नातकोत्तर फिजिक्स विभाग के चंद्रयान वीपनेट क्लब एवं स्नातकोत्तर केमिस्ट्री विज्ञान की आर. वेंकटरमन केमिकल सोसायटी द्वारा महिला डीएसटी-क्यूरी अनुदान के अंतर्गत ‘ज़ीमैन प्रभाव के माध्यम से परमाणु संरचना का अनावरण’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. दलजीत कौर, सहायक प्रोफेसर, फिजिक्स विभाग, डीएवी विश्वविद्यालय, जालंधर रही। इस कार्यक्रम में स्नातकोत्तर एवं स्नातक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।         प्राचार्या डॉ. एकता खोसला तथा फिजिक्स एवं केमिस्ट्री विभाग के फैकल्टी सदस्यों ने मुख्य अतिथि का ग्रीन प्लांटर भेंट कर स्वागत किया। डॉ. सलोनी शर्मा, विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर फिजिक्स विभाग ने विद्यार्थियों को सेमिनार के विषय से अवगत कराया, जबकि दीपशिखा, विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर केमिस्ट्री विभाग ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. सुशील कुमार ने चंद्रयान वीपनेट क्लब की विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। सेमिनार की शुरुआत ज़ीमैन प्रभाव के महत्व पर आधारित परिचय से हुई, जिसमें परमाणु संरचना और स्पेक्ट्रोस्कोपी को समझने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया गया।         डॉ. कौर ने अपने व्याख्यान में ज़ीमैन प्रभाव के सैद्धांतिक पहलुओं को विस्तार से समझाया, जिसमें सामान्य एवं असामान्य स्पेक्ट्रल रेखाओं का चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में विभाजन शामिल था। उन्होंने ज़ीमैन प्रभाव के विभिन्न अनुप्रयोगों जैसे—चंद्रमा के चुंबकीय क्षेत्र का निर्धारण, परमाणु ऊर्जा स्तरों का अध्ययन तथा मैग्नेटिक रेज़ोनेंस तकनीकों—पर भी चर्चा की। कार्यशाला सत्र के दौरान, उन्होंने ज़ीमैन प्रभाव उपकरण का विस्तृत प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को उपकरण के निर्माण, कार्य सिद्धांत एवं कैलिब्रेशन तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। इस व्यावहारिक अनुभव से विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता मिली कि किस प्रकार चुंबकीय क्षेत्र परमाणु ऊर्जा स्तरों और स्पेक्ट्रल उत्सर्जन को प्रभावित करता है।        यह सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस प्रायोगिक प्रदर्शन ने उनकी वैचारिक समझ को सुदृढ़ किया तथा उन्हें महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक जानकारी प्रदान की। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के सेमिनार एवं कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि ज़ीमैन प्रभाव जैसे जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने के लिए इस प्रकार की व्यावहारिक गतिविधियाँ अत्यंत आवश्यक हैं।      उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे ऐसे अवसरों का अधिकतम लाभ उठाकर अपने ज्ञान और शोध कौशल को विकसित करें तथा विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार की दिशा में अग्रसर हों। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें डॉ. दलजीत कौर के ज्ञानवर्धक सत्र एवं सभी प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया। यह सेमिनार-सह- कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी सिद्ध हुई, जिसने प्रतिभागियों के शैक्षणिक ज्ञान और प्रायोगिक कौशल को समृद्ध किया।

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