सत्ता विरोधी लहर, टीएमसी के खिलाफ नाराजगी, महिला सुरक्षा जैसे कई मुद्दे कर गए टीएमसी को सत्ता से बाहर
टाकिंग पंजाब
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल, एक ऐसा राज्य जहां पर ममता बनर्जी की पार्टी को हराना किसी चुनौती से कम नहीं था। तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई थी। टीएमसी को सत्ता में रहते हुए 15 साल हो गए थे, जिससे क्यास लगाए जा रहे थे कि ममता बनर्जी को बंगाल में हराना आसान नहीं है। हालांकि इस बार भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी दावों को झूठा साबित करते हुए इतिहास रच दिया है। बीजेपी ने वर्ष 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी थी, लेकिन अंतिम परिणाम टीएमसी के पक्ष में रहे थे, लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी तृणमूल कांग्रेस को आखिरकार सत्ता से बाहर कर ही दिया है। आइए समझें कि इस बार वो क्या बड़ी वजह रहीं, जिन्होंने बीजेपी को जीत का स्वाद चखा दिया।1 – सत्ता विरोधी लहर – तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई थी। ममता बनर्जी ने वाम दलों के मजबूत किले को ध्वस्त कर इतिहास रच दिया था, लेकिन टीएमसी को सत्ता में रहते हुए 15 साल हो गए थे। ऐसे में ममता सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर पड़ रहा था। इसके उल्ट बीजेपी पिछले 10 वर्षों में हाशिए की पार्टी की जगह एक मजबूत विरोधी पार्टी में बदलती गई। राज्य में 2016 के चुनाव में बीजेपी ने 10 प्रतिशत वोट पाए थे। इसके बाद 2021 के चुनाव मे उनके वोट बढ़कर 38 प्रतिशत हो गए। पार्टी ने पिछले चुनाव में 77 सीटें जीती थीं व 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 39 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। 2 – टीएमसी के खिलाफ नाराजगी – ममता बनर्जी अभी भी पश्चिम बंगाल की एक लोकप्रिय नेता हैं लेकिन बीजेपी ने ममता सरकार को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गवर्नेंस के मुद्दे पर आक्रामक तरीके से घेरा था। इससे ऐसे वोटर बीजेपी को लेकर आकर्षित हुए जो कुछ निश्चित तय नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा तृणमूल सरकार को पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों का सामना करना पड़ा है। इनमें स्कूल टीचर भर्ती घोटाला, राशन घोटा जैसे बड़े मामले हुए जिनकी जांच केंद्रीय एजेंसियों ने की। पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी जैसे पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से पार्टी की छवि को झटका लगा और जनता में नाराजगी बढ़ गई थी।3 – महिला सुरक्षा का मुद्दा – आरजी कर हॉस्पिटल में महिला डॉक्टर के साथ रेप और संदेशखाली जैसे कई बड़े मुद्दों के जरिए विपक्ष ने टीएमसी को घेरा और प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा एक बहुत पुराना मुद्दा रहा है। विपक्ष ने इसे लेकर ममता बनर्जी पर कड़े प्रहार किए और आरोप लगाया कि उनकी सरकार घुसपैठियों से सहानुभूति रखती है और उनकी वजह से ही जीतती रही है। बीजेपी ने साथ ही वादा किया कि वह सत्ता में आई तो घुसपैठियों की समस्या को दूर कर देगी। इसका असर भी इन चुवावी नतीजों में देखने को मिला। 4 – एसआईआर का फायदा मिला – पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट संशोधन का एसआईआर का अभियान चलाया गया जो एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन गया। इस बार इस अभियान के बाद लाखों वोटरों के नाम कट गए। इनमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे जो टीएमसी के समर्थक माने जाते थे, जिसका नुक्सान टीएमसी को हुआ। इस बार पश्चिम बंगाल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू वोटरों को संगठित करने के लिए जमकर प्रयास किया। बीजेपी ने यह नैरेटिव चलाया कि टीएमसी मुसलमानों के साथ सहानुभूति रखती है व एकमात्र बीजेपी ही इसपर रोक लगा सकती है। ममता सरकार हिंदू वोटरों के साथ भेदभाव करती है। यह बात भी हिंदू वोटरों के दिल में घर कर गई।
5 – ब्रांड मोदी का बड़ा असर – पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सामने नेतृत्व की बड़ी चुनौती रही थी। टीएमसी की ओर से ममता बनर्जी का राजनीतिक कद बहुत भारी पड़ता है, क्योंकि वह पिछले कई दशकों से प्रदेश की राजनीति पर हावी रही हैं। महिलाओं के साथ मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी उनकी लोकप्रियता रही है, लेकिन बीजेपी ने ममता बनर्जी की मजबूत छवि के सामने ब्रांड मोदी को खड़ा कर दिया गया जो चुनावों में बीजेपी के लिए तुरुप का पत्ता साबित हुआ। बीजेपी की ओर से पीएम मोदी, अमित शाह और राज्य के प्रमुख बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी समेत तमाम बड़े नेता खुलकर इस तरह के दावे करते रहे कि टीएमसी मुसलमानों की समर्थक पार्टी है। पश्चिम बंगाल चुनावों में भी इसका काफी प्रभाव दिखाई दिया।06 – पीएम मोदी की गारंटी चल गई – प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली बार भी विधानसभा चुनाव में आक्रामकता से प्रचार किया था। इस बार भी बंगाल चुनाव में पीएम मोदी काफी सक्रिय रहे। अपनी रैलियों में तृणमूल सरकार पर लगातार हमले करने के साथ पीएम मोदी ने एक और जबरदस्त वादा किया। उन्होंने वादा किया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन सरकार राज्य का कायापलट कर देगी। उन्होंने खास तौर पर महिला वोटरों को साधने का प्रयास किया। उन्होंने वादा किया कि सरकार बनते ही महिलाओं को हर महीने सीधे उनके बैंक खाते में 3 हजार रुपये भेजे जाएंगे। यह वादा भी महिलाओं की वोट हासिल करने में काम कर गया।