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माँ सरस्वती के पूजन के साथ अध्यापिकाओं व बच्चों द्वारा माँ सरस्वती को अर्पित किए गए पुष्प
उन्होंने कहा कि माँ सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि निर्मल होती है और सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वसंत ऋतु आते ही शरद ऋतु का समापन हो जाता है और इस तरह मौसम में परिवर्तन होता है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। लोग पीले परिधान धारण करते हैं। इसके अतिरिक्त अध्यापिकाओं ने बच्चों को ड्रैगन डोर के प्रति जागरूक किया कि वह पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज़ डोर का इस्तेमाल न करें।
इनोसेंट हार्ट्स ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस लोहारां,जो कि सांस्कृतिक विविधता को अपनाने के लिए जाना जाता है, ने विभिन्न आकर्षक गतिविधियों के माध्यम से इस परंपरा की समृद्धि का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक ‘हवन’ के साथ हुई, जो पवित्रता व शुभ प्रारंभ का प्रतीक है। सभी प्रतिभागी आशीर्वाद लेने के लिए तथा नवीनीकरण व समृद्धि की भावना लाने हेतु एकत्र हुए। इस दिन का मुख्य आकर्षण बड़ी उत्सुकता प्रतीक्षित पतंगबाजी प्रतियोगिता थी, जहाँ विद्यार्थी और शिक्षकों ने समान रूप से अपने कौशल और निपुणता का प्रदर्शन किया।
आसमान रंग बिरंगी पतंग से भरा हुआ था, जो इस त्यौहार से जुड़ा खुशी और उत्साह का प्रतीक है। परंपरा का पालन करते हुए सभी विद्यार्थियों और फैकल्टी मेंबर्स ने स्वयं को पीले रंगों की पोशाक में सजाया जो कि मौसम की जीवंतता व हरारत को दर्शाता एक प्रतीकात्मक इशारा था। इनोसेंट हार्ट्स कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन ने थीम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत – प्रेम और एकता का बंधन’ के साथ बसंत पंचमी मनाई। इस अवसर पर पतंगबाजी, और लोक-गीत गतिविधियों का आयोजन किया गया।

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