बीजेपी का हाथ थामते ही आम आदमी पार्टी पर बरसे एडवोकेट एचएस फूलका

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– कहा, आप के दांत दिखाने के और, खाने के और.. सीएम मान बोले, मेरे पुराने साथी रहे, गुडलक

टाकिंग पंजाब

चंडीगढ़। साल 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट व पूर्व आप नेता एचएस फूलका ने आखिरकार भाजपा का हाथ थाम लिया। उन्हें दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पार्टी जॉइन करवाई है। भाजपा में शामिल होने के बाद एडवोकेट एचएस फूलका ने आम आदमी पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि आप के दांत दिखाने के और, खाने के और हैं। फूलका ने कहा कि मैने 2003 से 2013 तक बीजेपी की लीगल टीम को हेड किया, लेकिन साल 2014 में उनसे गलती हो गई।  अन्ना आंदोलन के समय आप पार्टी से जुड़ गया। सोचा था कि यह पार्टी देश बदलने आई है, लेकिन थोड़े समय बाद पता चला कि इस पार्टी के दांत दिखाने के और खाने के और हैं। एडवोकेट फूलका ने कहा कि आज पंजाब का हाल देखकर दुख होता है। अपने आपको गिल्टी महसूस करते हैं। आज पंजाब की कानून व्यस्था को देख लो। पंजाब इस स्थिति से गुजर रहा है कि आज कोई ऐसा कारोबारी या बिजनेसमैन नहीं है, जिसे फिरौती की कॉल न आई हो। पंजाब में करप्शन खत्म करने आई पार्टी खुद करप्शन में लिप्त हो गई है। फूलका ने कहा कि हर दफ्तर में केजरीवाल का आदमी बैठा है। एडवोकेट फूलका ने कहा कि 2039 में पंजाब का पानी प्रदूषित हो जाएगा व पंजाब की जमीन बंजर होने वाली है।

   मैं पिछले कई सालों से काम कर रहा हूं, लेकिन सरकार इस तरफ नहीं सोच रही है। मेरे दोस्तों ने भी कहा कि भाजपा सरकार इसे बचा सकती है। मोदी पंजाब व पंजाबियों को बहुत पंसद करते हैं। वह मुझे भी बहुत पसंद करते हैं। लाल किला में हुए समागम में मुझे पीएम ने अपने पास बिठाया। इस दौरान एडवोकेट एचएस फूलका ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। फूलका ने कहा कि 1984 का नरसंहार इंदिरा गांधी ने प्लान किया था। सज्जन कुमार का केस फाइनल हियरिंग पर आ गया था। उस समय बार काउंसिल ने कहा कि आपके पास राजनीतिक पद है। आप हियरिंग नहीं कर सकते है। यह केस मेरे लिए अहम था। इसलिए मैंने न केवल विपक्ष का पद छोड़ा। बल्कि राजनीति छोड़ी। नतीजा यह हुआ है कि सज्जन कुमार आठ साल से जेल में है।    एडवोकेट फूलका के राजनीतिक जीवन की बात करें तो 2014 में फूलका आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। 2015 में दिल्ली में आप की सरकार बनने के बाद वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए थे। साल 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव में आप के टिकट पर लुधियाना की दाखा सीट से चुने गए। पार्टी ने उन्हें विपक्ष का नेता बनाया। उन्होंने पंजाब विधानसभा में बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब के बेअदबी मामले और अन्य सिख मुद्दों को उठाया। हालांकि 2019 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इस्तीफे का कारण पार्टी नेतृत्व से मतभेद, 1984 दंगों पर पर्याप्त समर्थन न मिलना व पंजाब के स्थानीय मुद्दों पर फोकस की कमी को बताया था।    उधर फूलका के भाजपा जॉइन करने पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि उनको मुबारक, मेरे पुराने साथी रहे हैं। मैं पार्लियामेंट में था, वह विधानसभा में थे। उन्होंने नेता विपक्ष से भी इस्तीफा दे दिया था। दाखा विधानसभा से भी रिजाइन कर दिया था। अगर लोगों ने कोई बंदा चुना और वह बीच में छोड़ जाए, यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। मैंने तो आज तक ऐसे व्यक्ति को दोबारा जीतते हुए नहीं देखा। उधर दूसरे एंगल से देखें तो करीब सात साल तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद फूलका ने एक बार फिर मैदान में वापसी कर ली है। उनकी इस वापसी को पंजाब की सियासत में अहम माना जा रहा है। खासकर बीजेपी के लिए यह कदम एक बड़े ‘बूस्ट’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पार्टी को राज्य में नई ऊर्जा और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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