
पंजाब 2027 विधानसभा चुनावों में 50 विधायकों के टिकट काट सकती है आम आदमी पार्टी

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अब आप सोच रहे होगे कि इतने सारे विधायकों के टिकट काटने पर तो विधायक बागी हो जाऐंगे व अपनी ही पार्टी को नुक्सान पहुंचा सकते हैं, लेकिन हाईकमान को इस बात का अंदाजा हो चुका है कि उनकी पार्टी के कुछ पिलर खोखले हो चुके हैं। बगावत का डर तो है ही, लेकिन राजनीति में एक शब्द बहुत पावरफुल होता है ओर वह है एंटी इंक्मबेंसी। यह एंटी इंक्मबेंसी की लहर हर सरकार के साथ आती है, क्योंकि हर पार्टी अपना हर वादा पूरा नहीं कर पाती, लेकिन राजनीतिक माहिरों का कहना है कि इस बार यह एंटी इंक्मबेंसी सरकार के काम को लेकर तो कम है, जबकि उनके अपने ही विधायकों व नेताओं के कारण ज्यादा दिखाई दे रही है।
अगर हालात ऐसे हो जाऐं तो पार्टी हाईकमान के पास ओर कोई चारा ही नहीं रह जाता है। इसका कारण यह है कि अगर किसी विधायक या नेता की छवि खराब होती है तो वह मात्र उनकी छवि ही नहीं बल्कि पार्टी की छवि पर भी असर डालती है। गुस्सा तो नेता पर होता है, लेकिन वोट पार्टी का खराब होता है। सूत्रों की माने तो पार्टी अपने विधायकों व नेताओं का सर्वे करवा रही है। इस सर्वे में बहुत अहम खुलासे सामने आ रहे हैं। जालंधर में तो इसका बहुत ज्यादा असर होने जा रहा है। हाईकमान तक जो जालंधर की रिपोर्ट पहुंची है, वह ज्यादा अच्छी नहीं है। सूत्रों के अनुसार जालंधर के विधायकों व 2 हल्का इंचार्ज पर भी पार्टी की गाज गिर सकती है।
हालांकि इसको लेकर पार्टी जल्दबाजी करने के मूढ में नहीं है, लेकिन कुछ न कुछ तो होने वाला है। माना जा रहा है कि अब भृष्टाचार के इस खेल को खत्म करने के लिए पंजाब विजीलेंस ब्यूरों की एंटी हो सकती है। यह सरकारी जांच एजेंसी अवैध कालोनियों के निर्माण, सट्टा व भृष्टाचार से संबंधित जांच करने जा रही है। अवैध कालोनियों को लेकर भी हाईकमान के पास काफी शिकायतें जा रही हैं। हाईकमान इस बात से हैरान है कि विधायकों की अंदेखी कर यह कालोनिया कैसे डिवेल्प हो रही है व ऐसा कैसे मुमक्नि है?। हाल ही में एक पीला परना डालने वाले आप नेता की कालोनी का भी खुलासा हुआ था। उस नेता की वजह से नगर निगम व सरकार को भारी नुक्सान उठाना पड़ा था।
फिलहाल सूत्रों की माने तो अब हाईकमान किसी भी खतरे को मोल लेने के मूढ मे नहीं है, जिसके चलते पार्टी के कई विधायकों, हल्का इंचार्ज व नेताओं पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। इसका मकसद पार्टी की छवि को सुधारना व पार्टी विधायकों व नेताओं के कारण बनी इंक्मबेंसी को खत्म करना माना जा रहा है। अब देखना होगा कि हाईकमान की राडार में कौन कौन नेता आते हैं। अब यह भी देखना होगा कि पार्टी अगर ऐसी कार्रवाई करती है तो क्या पार्टी की छवि में सुधार आता है या नहीं ? इसके अलावा अगर पार्टी 50 विधायकों के टिकट काटती है तो उनकी जगह पर 50 साफ छवि वाले लोगों को लाना व इतने कम समय में लोगों के बीच उनका पैठ बनाना भी काफी मुश्किल होने वाला है। 



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