ईरान ने सीजफायर के लिए अमेरिका को भेजा था 10 पाईंट का प्रस्ताव…ट्रम्प ने कहा, यह काफी नहीं

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– अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने किया दावा, ईरान की लीडरशिप सीजफायर के लिए मांग रही थी भीख

टाकिंग पंजाब

नई दिल्ली। आज हर तरफ इस बात की चर्चा है कि ईरान व अमेरिका में सीजफायर हो गया है। यह सीजफायर ऐसे ही नहीं हुआ है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान की लीडरशिप सीजफायर के लिए भीख मांग रही थी, क्योंकि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि अब किसी भी हालत में ईरान को परमाणु बम बनाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है और जहाज वहां से गुजरते रहेंगे। अमेरिका और ईरान की सेनाएं इस इलाके पर नजर रखे हुए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई देश ईरान को हथियार देगा, तो उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला तुरंत लागू होगा और इसमें कोई छूट नहीं होगी।    हालांकि इरान का कहना है कि उसने सीजफायर के लिए अमेरिका को 10 पाईंट का प्रस्ताव भेजा था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसका 10 पॉइंट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की जीत बताया है। सीजफायर के बाद ट्रम्प ने बयान दिया कि ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्रस्ताव भेजा। यह काफी नहीं है, लेकिन उन्होंने बहुत अहम कदम उठाया है। देखते हैं, आगे क्या होता है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का दावा है कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। काउंसिल इसे जीत बता रही है। अमेरिका को भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में 10 शर्तें हैं।   ईरान की पहली शर्त है कि अमेरिका व इजराइल न केवल मौजूदा बमबारी रोकें, बल्कि भविष्य में कोई ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ न करने की लिखित गारंटी दें। सभी परमाणु व आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाए, ताकि ईरान फिर वैश्विक तेल बाजार में लौट सके। इसके अलावा अमेरिका व उसके सहयोगी देशों द्वारा फ्रीज किए गए करीब 100 बिलियन डॉलर के फंड ईरान को मिले। इसमें तेल का बकाया पैसा भी है एक अन्य शर्त के अनुसार यह 14 दिन का सीजफायर एक ऑफिशियल समझौता में बदलना चाहिए, जो मिडिल-ईस्ट में युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर दे। खाड़ी देशों व इराक से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को समेटा जाए और क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय देशों को दी जाए।ईरान की मांग है कि हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका हर्जाना दे या इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने की व्यवस्था करे।    एक अन्य शर्त में ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपना कानूनी व सुरक्षा कंट्रोल बनाए रखना चाहता है। वह इसे अपनी ‘समुद्री सीमा’ का हिस्सा मानता है। ईरान जहाजों को रास्ता देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए एक ईरानी सेना से कोऑर्डिनेशन करना होगा व हर जहाज को डेटा साझा करना होगा। ईरान का कहना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर शिप को ईरान व ओमान को समुद्री टोल देना होगा। हर शिप से 20 लाख डॉलर, यानी 19 करोड़ रुपए वसूल सकते हैं। इसके साथ ही इजराइल को लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हुती व सीरिया के खिलाफ ऑपरेशन बंद करने होंगे, ताकि इलाके में तनाव कम हो। ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा से ठीक पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की थी।   सीजफायर की घोषणा के बाद इजराइल ने भी इस सीजफायर का समर्थन किया है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान में कहा कि यह सीजफायर तभी संभव होगा जब होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोल दिया जाए। ईरान अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के अन्य देशों पर अपने हमले बंद कर दे। हालांकि, बयान में यह भी साफ किया गया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। जबकि इस सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी पोस्ट में साफ कहा था कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है। हालांकि ईरान ने भी साफ किया है कि युद्ध खत्म नहीं हुआ, यह सिर्फ युद्ध विराम है। 

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