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शिक्षा ग्रहण करने आए विद्यार्थियों ने भी अपने विचार किए साझा
टाकिंग पंजाब
जालंधर। मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज, जालंधर में देश के किसी भी हिस्से में रहने या पढ़ने वाले नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए “सक्षम टेक विज़नलैब” की स्थापना की गई है, ताकि ये विद्यार्थी कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सकें। इस लैब का उद्घाटन डी.ए.वी. मैनेजिंग कमेटी के नेशनल कोऑर्डिनेटर (कॉलेजेस) एवं डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर के प्रिंसिपल प्रो. अनुप कुमार ने रिबन काटकर किया। उनका स्वागत प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह और स्टाफ ने फूलों के गुलदस्तों के साथ किया। प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह ने बताया कि यह लैब सक्षम पंजाब के सहयोग से स्थापित की गई है। इस लैब में शिक्षा प्राप्त करने के लिए पंजाब, दिल्ली और बिहार से विद्यार्थी आए हैं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. अनुप कुमार और प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर प्रो. प्रेम सागर ने भजन प्रस्तुत किया। मैडम दीपिका सागर ने सक्षम की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी तथा सक्षम टेक विज़न लैब की कार्यप्रणाली का डेमो भी प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार नेत्रहीन विद्यार्थियों को सक्षम बनाया जाएगा। शिक्षा ग्रहण करने आए विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रो. अनुप कुमार ने कहा कि यह लैब क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनेगी, जहां नेत्रहीन विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा प्राप्त करेंगे। उन्होंने इसके लिए प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह और सक्षम पंजाब को बधाई दी तथा बताया कि वे प्रारंभ से ही सक्षम से जुड़े हुए हैं। अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रिंसिपल डॉ. जग रूप सिंह ने कहा कि यह कार्य स्वामी विरजानंद जी के मिशन को आगे बढ़ाने वाला है, जो स्वयं नेत्रहीन थे, लेकिन उन्होंने संस्कृत व्याकरण में महान कार्य किया और देशभर से विद्यार्थी उनसे शिक्षा ग्रहण करने आते थे। स्वामी दयानंद भी उनके शिष्यों में से एक थे। उन्होंने प्रो. अनुप कुमार, प्रो. प्रेम सागर, मैडम दीपिका और अन्य सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया, जिन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि मेहर चंद पॉलिटेक्निक में स्थापित यह सक्षम टेक लैब पूरे देश में प्रसिद्ध होगी, जब विद्यार्थी कंप्यूटर और मोबाइल प्रशिक्षण लेकर अपने सपनों को साकार करेंगे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रभु दयाल ने बहुत ही सुंदर ढंग से किया।