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सोशल मीडिया के दुरुपयोग की आशंका को लेकर भारत भी उम्र के आधार पर लगाए जा सकते हैं कुछ प्रतिबंध
दरअसल, डीपफेक की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। डीपफेक के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों के बारे में उद्योग जगत से बातचीत जारी है। यह पहले से घोषित उपायों से कहीं अधिक कठोर होंगे। उन्होंने कहा कि कानून को और अधिक मजबूत बनाने के लिए संसद में सर्वसम्मति बनानी होगी। दरअसल, दुनिया के कई देशों ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर या तो बैन लगा दिया है या फिर उससे जुड़ी कई पाबंदियां लगा दी हैं। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक व यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
इसमें तो माता-पिता की सहमति का भी प्रावधान भी नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना जो कि लगभग 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगाया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में 15 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर अंकुश लगाया गया है। फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला कानून बनाया है। हालांकि, वहां माता-पिता की सहमति से कुछ छूट मिल सकती है। इसके अलावा नॉर्वे में भी 15 साल के बच्चों तक पर यह ही पाबंदी है। कहा जा रहा है कि नॉर्वे सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए अपनी न्यूनतम आयु सीमा को 13 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने जा रहा है।
नॉर्वे प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर का कहना है कि यह बच्चों को बचाने के लिए जरूरी है। उधर ब्रिटेन में भी अभी प्रतिभंध तो नहीं है, लेकिन वह भी कड़े प्रतिबंध की तैयारी कर रहा है। ब्रिटेन सरकार भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने या कड़े नियंत्रण लगाने के लिए परामर्श कर रही है। ब्रिटेन के अलावा स्पेन और डेनमार्क में भी तैयारी में हैं। स्पेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की योजना है।
डेनमार्क और ग्रीस में भी न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष करने पर काम कर रहे हैं। भारत भी सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े प्रतिबंधों और सख्त वेरिफिकेशन पर चर्चा कर रही है। अब यह योजना कब अमल में लाई जाती है, इसका तो अंदाजा नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भारत में पिछले काफी समय से उठ रही है। अब देखना होगा कि भारत बाकी देशों की तरह यह प्रतिबंध लगाता है या नहीं ?।


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