2027 में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के चलते दलित वोटर पर भाजपा की नजर
पंजाब में 32 प्रतिशत दलित वोटर, 23 सीटों पर पूरी तरह से दबदबा .. भाषण में रविदासिया-वाल्मीकि समाज पर रखा फोकस
टाकिंग पंजाब
जालंधर। देश के ज्यादातर हिस्सों में अपना ‘वर्चस्व’ स्थापित करने के बाद अब भाजपा गठबंधन की नजर पंजाब की सत्ता पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब में जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां का यह दौरा इसका ही एक पार्ट कहा जा रहा है। पीएम ने जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर रखा व डेरा सचखंड बल्लां में संत निरंजन दास से मुलाकात भी की। देखा जाए तो पीएम का यह दौरा पूरी तरह से धार्मिक कहा जा रहा है। इस दौरे के दौरान पीएम ने सीधे तौर पर राजनीति की कोई बात भी नहीं की, लेकिन वोट बैंक के लिहाज से बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए। इसमें संत रविदास की धरती से आने की बात हो या अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम महार्षि वाल्मीकि के नाम पर रखना हो, सभी बाते वोटबैंक को लेकर ही की लगती हैं। पीएम ने 33 मिनट के संबोधन में दलित वोटर के गढ़ जालंधर, होशियारपुर का खूब जिक्र किया। दरअसल पंजाब में सिख समाज के रोष का सामना कर रही भाजपा की अब दलित वोटबैंक पर नजर है। इसके साथ ही रविदासिया समाज के सबसे बड़े डेरा सचखंड बल्लां की संगत दोआबा क्षेत्र में बड़ी संख्या में है। दोआबा की 23 विधानसभा सीटों पर दलित वोटरों का प्रभाव माना जाता है। इन सीटों पर अब तक कांग्रेस का दबदबा रहा है, हालांकि बीजेपी का मानना है कि अब इन 23 सीटों पर कांग्रेस का प्रभाव ज्यादा नहीं रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री के इस दौरे के जरिए पंजाब भाजपा खुद को तीसरे फ्रंट के तौर पर मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी हिंदू-दलित-जट्ट सिख वोटरों के समीकरण पर काम कर रही है। पंजाब में पार्टी की स्थिति को देखते हुए फिलहाल भाजपा का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव में इतनी सीटें जीतना है कि बिना उसके विधायकों के सरकार बनाना संभव न हो। अगर आपने पीएम के भाषण को गौर से सुना हो तो आपको स्पष्ट हो जाऐगा कि दलित वोटर्स को साधने के लिए पीएम ने कईं अहम बातें कहीं। पीएम मोदी ने डेरा बल्लां में खुद को गुजराती होने के बावजूद लोकसभा सीट वाराणसी से जोड़ा। अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि मैं काशी की धरती से आया हूं, जहां संत रविदास ने जन्म लिया। पीएम बोले, आप सभी जानते हैं कि मेरा रिश्ता उस काशी से है, जो संत रविदास की जन्मभूमि है। पीएम ने कहा कि काशी ने मुझे सेवा का मौका दिया। काशी के उन घाटों को मैंने छुआ है, जहां गुरु रविदास ने शिक्षा ली। यहीं से संत रविदास ने कहा था कि मन चंगा तां कठौती च गंगा। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने पहली बार किसी दलित समाज के संत को सम्मान दिया। उन्होंने गुरु श्री पीपल दास जी, संत श्री श्रवण दास जी को याद किया और कहा कि इनके चलते गुरु रविदास के विचार जन-जन तक पहुंचे। पीएम ने कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों के चलते संत निरंजन दास केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। पीएम ने कहा कि संतों ने हमेशा समानता की बात की है। इसी भावना को लेकर अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। संत रविदास के जन्म को 6 सदियां बीत गईं। तबसे अब तक भारत ने कितने हमले झेले। कठिन समय में काशी में संत रविदास का जन्म हुआ। उन्होंने समाज को झकझोरा व हमें सिखाया कि सब एक ही मिट्टी के बने हैं पीएम ने विकसित भारत के विचार को पहली बार डेरा बल्लां में गुरु रविदास के विचार से जोड़ा। पीएम ने कहा कि बेगमपुरा बसाने की कल्पना संत रविदास ने की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा शहर होना चाहिए जहां कोई दुखी न हो, कोई वंचित न हो। मुझे संतोष है कि आजादी के इतने वक्त बाद देश अब मिशन मोड में संत रविदास के विचारों को लागू करने का काम कर रहा है। विकसित भारत संत रविदास जी के विचार से निकला है। हमें विश्वास से है कि संत रविदास महाराज के आशीर्वाद से हम विकसित भारत के मिशन को पाकर रहेंगे। पीएम ने अपने संबोधन में जालंधर, लुधियाना, होशियारपु, मोगा व फिरोजपुर का जिक्र किया, लेकिन इसमें भी बार-बार जालंधर, होशियारपुर व लुधियाना का नाम बोला। पीएम ने कहा कि हमने आज ही बजट पेश किया। हमारी सरकार ने सड़क, पुल, बिजली, पानी, गरीबों को घर, सिंचाई के क्षेत्रों में निवेश किया है। इस बजट में इन क्षेत्रों में पहले से अधिक 17 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इससे आप सबको फायदा होगा, आपको अवसर मिलेंगे। इस बजट का फोकस लुधियाना, जालंधर, होशियारपुर जैसे शहरों के विकास पर है। इसी तरह अन्य शहर भी शामिल हैं।