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गैस की किल्लत के चलते लोगों को याद आ रहा पुराना जमाना.. वही सिलेंडर के लिए परेशानी, वहीं गैस एजेंसियों के बाहर धक्के खाना

वही, गैस सिलेंडर से भरी रेहड़ी वाले को आवाजे लगाना.. देखो, लौट आए अच्छे दिन, फिर लौट आया वही जमान

टाकिंग पंजाब

जालंधर। आज से लगभग एक दशक पहले ऐसा समय था, जिसमें लोगों को गैस सिलेंडर लेने के लिए या तो गैस एजेंसियों को 15 से 20 फोन करने पड़ते थे या फिर कईं चक्कर काटने पड़ते थे। गैस एजेंसी वाले फोन तो किसी का उठाते ही नहीं थे, जिसके चलते लोगों को गर्मी, सर्दी, बारिश में इन गैस एजेंसियों में जाकर हाजरी भरनी ही पड़ती थी। इसके बाद फिर समय ऐसा आया कि सिलेंडर की ऑनलाईन बुकिंग शुरू हो गई व लोगों की बुकिंग के कुछ दिन बाद ही सिलेंडर घर पहुंचने लग गया।   गैस सिलेंडर आराम से घर पहुंचने से लोगों को भी आराम व गैस एजेंसियों को भी शांति। इसको लेकर केंद्र सरकार की खूब वाहावाही हुई, लेकिन आज एक बार फिर से वही​ पुराना जमाना वापस लौट आया है। ईरान-अमेरिका युद्द के नाम पर गैस की भारी किल्लत बताई जा रही है, जिससे लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा। आज पुराने समय के जैसे ही लोग गैस एजेंसियों को फोन कर रहे हैं, एजेंसी में जाकर अपनी हाजरी लगवा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दरअसल एक बार फिर से गैस एजेंसियों की बादशाहत कायम कर दी गई है, जिससे आम जनता काफी परेशानी की दौर से गुजर रही है।   दरअसल इस युद्द के बाद से ही गैस सिलेंडर को लेकर एक अजीब सा माहौल पैदा हो गया है। गैस कंपनियों के तरफ से एक फरमान सुना दिया गया है कि गैस की बुकिंग सिलेंडर डिलिवरी के 25 दिन बाद ही होगी। बुकिंग होने के बाद कंपनी से मैसेज आता है कि एक सप्ताह में आपको सिलेंडर मिल जाऐगा। अब 25 दिन बाद बुकिंग व 7 दिन का डिलीवरी पीरियड मिला कर 32 दिन हो जाते हैं। अब ऐसा भी नहीं है कि कंपनी ने सात दिन कह दिए तो 7 दिन बाद आपका सिलेंडर आपके दरवाजे पर होगा। नहीं भाई, ऐसा कोई कानून थोड़ा ही है, उसके लिए 10 से 15 दिन भी लग सकते हैं।  अब सोचने की बात यह है कि भला एक आम आदमी 40 से 45 दिन तक एक ही सिलेंडर के सहारे अपनी रसोई कैसे चला सकता है ?। एक परिवार में अगर 5 से 6 लोग हैं तो उनका सिलेंडर ज्यादा से ज्यादा 25 से 30 दिन ही चलता है, वह भी टेढा-मेढा कर, लिटा करके। अब बाकी के बचे 12 से 15 दिन का क्या होगा ?। मगर जनता की परेशानी से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकारें इसे गंभीर मुद्दा मान नहीं रही हैं व गैस एजेंसी वाले अपनी बादशाहत वापस मिलने के गरूर में मस्त हैं। फूड सप्लाई विभाग वाले इन गैस एजेंसियों की चैकिंग के नाम पर खानापूर्ति करके खुश हैं। एक एजेंसी पर गए, फोटो खिचवाई, अखबार में भेज दी ओर हो गई चैकिंग..।   परेशान हो रहा तो मात्र आम आदमी। वह आम आदमी जो अपने काम छोड़ कर गैस एजेंसी के बाहर लाईन में लग रहा है, जिसको पैसे खर्च करने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। जनता  दशक पुराने बीते दिन याद आ रहे हैं। अब उसे अपने बच्चों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि कैसे वह 2-2 घंटे गैस एजेंसी के बाहर लाईन में लगकर गैस की बुकिंग करवाता था। गैस एजेंसी वालों को दिन में 15 से 20 फोन कर देता था, लेकिन वह ​फिर भी फोन नहीं उठाते थे। अब वह अपने बच्चों को यह दिखा सकता है कि देखों पुराने जामने में हम ऐसे ही गैस एजेंसी के बाहर धक्के खाते थे, गैस सिलेंडर से भरी रेहड़ी वाले को आवाजे लगाते थे। देखो, वह समय, वह अच्छे दिन फिर लौट आए हैं।

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