
किसानों का आज दिल्ली कूच …पंजाब-हरियाणा की शंभू, खनौरी व डबवाली बॉर्डर पर इकट्ठा होने लगे किसान

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इस बार भी किसानों को पंजाब-हरियाणा की शंभू, खनौरी व डबवाली बॉर्डर पर इकट्ठा होने के लिए कहा गया है। सरवण सिंह पंधेर का आरोप है कि सरकार के मन में खोट है व सरकार किसानों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हम सरकार के प्रस्ताव पर विचार करेंगे, लेकिन आंदोलन तो होकर रहेगा। उधर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का कहना है कि अंदोलन नहीं होना चाहिए बल्कि बातचीत के जरिए सब बातों का हल निकलना चाहिए। किसानों के आंदोलन को देखते हुए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के बॉर्डर सील कर दिए गए हैं। दिल्ली में कड़ी बैरिकेडिंग की गई है व एक महीने के लिए धारा 144 भी लागू कर दी गई है।
दूसरी तरफ एक बड़ी खबर यह है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने खुद को ‘दिल्ली चलो मार्च’ से अलग कर लिया है। दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा एक प्रेस स्टेटमेंट जारी की गई है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 13 फरवरी को किसानों द्वारा आयोजित दिल्ली चलो मार्च से उनका कोई ताल्लुक नहीं है। हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि अन्य संगठनों को विरोध करने का अधिकार है और केंद्रीय सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से उनके साथ पेश आना चाहिए। इसके साथ ही प्रेस स्टेटमेंट में एसकेएम ने पीएम मोदी से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि उनकी सरकार लोगों की आजीविका की मांगों पर 16 फरवरी 2024 को देशव्यापी ग्रामीण बंद और औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल के संदर्भ में किसानों और श्रमिकों के मंच से चर्चा के लिए तैयार क्यों नहीं है ?
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस द्वारा किसानों क मार्च को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किए गए हैं। पुलिस ने सार्वजनिक बैठकों और शहर में प्रवेश करने वाले ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों पर भी एक महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में 12 मार्च तक सभी बड़ी सभाओं पर भी प्रतिबंध रहेगा। आपको बता दें कि 17 सितंबर 2020 को लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर देश के इतिहास में सबसे लंबा किसान आंदोलन चला था। 25 नवंबर 2020 को किसान दिल्ली के लिए निकले। इसके 378 दिन बाद 11 दिसंबर 2021 को किसानों ने किसान संयुक्त मोर्चा विजय दिवस मनाया, जिसके बाद आंदोलन खत्म हुआ।

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