राजनीतिक गलियारों में छिड़ी बड़ी चर्चा.. बरसों से रूठे भाई फिर लगा सकते हैं एक दूसरे को गले

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राजनीति में क्या फिर से होने जा रहा है बड़ा उल्टफेर ,,, भाजपा को कोसने वाले रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस से किनारा कर हो चुके हैं भाजपा में शामिल

टाकिंग पंजाब

नईं दिल्ली। बड़े बुर्जुग कहा करते थे, यह राजनीति है, इसमें कुछ भी हो सकता है। इसमें कभी भाई, भाई का नहीं रहता तो कभी-कभी तो बेटा भी बाप से धोखा कर सकता है। इसी राजनीति से निकल कर 2 खबरें सामने आई हैं जो कि यह दर्शाती हैं कि राजनीति में कोई भी किसी का स्थायी मित्र नहीं है व कोई भी स्थायी शत्रु नहीं है।     जीं हां.. पहला मामला है कांग्रेस में लंबे समय से रहकर भाजपा को कोसने वाले रवनीत सिंह ​बिट्टू का है, जिन्होंने एक लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद अब भाजपा का दामन थाम लिया है। पंजाब के सीए रहे स्वर्गीय सरदार बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू का कद कांग्रेस में काफी बड़ा था। वह भाजपा व अकाली दल पर जमकर प्रहार करते रहे हैं, लेकिन राजनीति देखिए कि अब वही रवनीत सिंह ​बिट्टू इन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को कोसते नजर आऐंगे। कहा जा रहा है कि भाजपा उनको लुधियाना से ही सीट देने जा रही है।     इसके बाद दूसरा जो बड़ा मामला सामने आ रहा है, वह यह है कि राहुल और वरुण गांधी जो कि एक दूसरे से ज्यादा बात तक नहीं करते हैं, चर्चाएं तेज हैं कि यह दोनों भाई एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं। इसकी मुख्य वजह भी सामने आ रही है कि भाजपा वरुण गांधी का टिकट पीलीभीत से काट सकती है। अगर यह चर्चा सही हैं तो क्या गांधी परिवार में दशकों पुरानी सियासी दुश्मनी अब खत्म होने जा रही है ? क्या राहुल और वरुण एक साथ आ जाएंगे ?   यह मात्रा चर्चा ही नहीं है बल्कि यह सवाल तब से ही उठ रहा है, जब से कांग्रेस ने वरुण गांधी को पार्टी ज्वॉइन करने का खुला ऑफर दिया है। लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हैं व अब सबकी निगाहें वरुण गांधी पर टिकी हुई हैं। दरअसल यह चर्चा इस लिए भी तेज हो रही है क्योंकि रविवार को बीजेपी ने अपने 111 उम्मीदवारों की पांचवीं लिस्ट जारी की, जिसमें पीलीभीत से मौजूदा सांसद वरुण गांधी का टिकट काट दिया गया। वैसे तो यह सीट गांधी परिवार की परंपरागत सीट रही है व वरुण गांधी की मां मेनका गांधी इस सीट से 6 बार सांसद चुनी गईं।    इतना ही नहीं, वरुण गांधी यहां से 2 बार सांसद चुने गए, यानी कि वह पिछले 10 सालों से इस सीट पर राज कर रहे हैं। नया ट्वीस्ट देखिए, इस बार बीजेपी ने वरुण गांधी को पीलीभीत से लोकसभा चुनाव का टिकट न देकर यहां से जतिन प्रसाद को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस इस मौके को भुनाने का मौका न छोड़ते हुए अपना पासा फैंका व वरुण गांधी को कांग्रेस ने पार्टी ज्वॉइन करने का खुला ऑफर दे दिया। अब सबकी निगाहें इसी बात पर लगी हैं कि वरुण गांधी का अगला कदम क्या होगा।    माना जा रहा है कि अगर वरुण गांधी कांग्रेस का ऑफर स्वीकार करते हैं तो गांधी परिवार के बीच सालों से जारी सियासी दुश्मनी खत्म हो जाएगी। चचेरे भाई राहुल गांधी और वरुण गांधी फिर एक बार सियासी तौर पर साथ आ जाएंगे। उधर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने यहां तक कह दिया कि वरुण को गांधी होने की कीमत चुकानी पड़ रही है। गांधी परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया है। हम चाहते हैं कि वरुण गांधी अब कांग्रेस में शामिल हों. अगर पार्टी ज्वॉइन करते हैं, तो हमें खुशी होगी।      दरअसल वरुण गांधी पिछले काफी समय से अपनी ही पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके बयान खूब छाए रहे हैं। चाहे शराब का प्रचार हो या फिर सारस या आरिफ की दोस्ती की कहानी या फिर यूपी में सड़कों के निर्माण का मुद्दा, वरुण गांधी के बीजेपी सांसद रहते इन मुद्दों को तेजी से उठाया। यहां तक कि बेरोजगारी, अग्निवीर योजना और केंद्र की फ्री राशन योजना तक वरुण गांधी को रास नहीं आई। कहा तो ये भी जा रहा है कि अपनी ही सरकार के विरोध में स्वर उठाना भी वरुण का टिकट काटे जाने की बड़ी वजह है, हालांकि बीजेपी ने उनकी मां मेनका गांधी को सुल्तानपुर से टिकट दिया है।

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